Wednesday, 6 November 2019

जरा सोचिये हमने क्या किया ?

*जरा सोचिये हमने क्या किया*

*1.*  चोटियां छोड़ी ,
*2.*  टोपी, पगडी छोड़ी ,
*3.*  तिलक, चंदन छोड़ा
*4.*  कुर्ता छोड़ा ,धोती छोड़ी ,
*5.*  यज्ञोपवीत छोड़ा ,
*6.*  संध्या वंदन छोड़ा ।
*7.*  रामायण पाठ, गीता पाठ छोड़ा ,
*8.*  महिलाओं, लडकियों ने साड़ी छोड़ी , बिछिया छोड़े , चूड़ी छोड़ी , दुपट्टा, चुनरी छोड़ी , मांग बिन्दी छोड़ी ।
*9.*  पैसे के लिये, बच्चे छोड़े (आया पालती है)
*10.*  संस्कृत छोड़ी , हिन्दी छोड़ी ,
*11.*  श्लोक छोडे, लोरी छोड़ी ।
*12.*  बच्चों के सारे संस्कार (बचपन के) छोड़े ,
*13.* सुबह शाम मिलने पर राम राम छोड़ी ,
*14.* पांव लागूं, चरण स्पर्श, पैर छुना छोड़े ,
*15.* घर परिवार छोड़े ( अकेले सुख की चाह में संयुक्त परिवार)।

*अब कोई रीति या परंपरा बची है ?* ऊपर से नीचे तक गौर करो, तुम कहां पर हिन्दू हो, भारतीय हो, सनातनी हो, ब्राह्मण हो, क्षत्रिय हो, वैश्य हो

*कहीं पर भी उंगली रखकर बता दो कि हमारी परंपरा को मैनें ऐसे जीवित रखा हैं*
 जिस तरह से हम धीरे धीरे बदल रहे हैं- *जल्द ही समाप्त भी हो जाएंगे।*

*बौद्धों ने कभी सर मुंडाना नहीं छोड़ा!*

*सिक्खों ने भी सदैव पगड़ी का पालन किया!*

*मुसलमान ने न दाढ़ी छोडी और न ही 5 बार नमाज पढ़ना!*

*ईसाई भी संडे को चर्च जरूर जाता है!*
फिर *हिन्दू अपनी पहचान-संस्कारों से क्यों दूर हुआ ?* 

*कहाँ लुप्त हो गये* - *गुरुकुल की शिखा*, *यज्ञ*, *शस्त्र-शास्त्र*, *नित्य मंदिर जाने का संस्कार ?*
*हम अपने संस्कारों से विमुख हुए, इसी कारण हम विलुप्त हो रहे हैं।* 

*अपनी पहचान बनाओ! अपने मूल-संस्कारों को अपनाओ!!!*

*सप्ताह मे कम से कम एक दिन तो बच्चों के साथ मन्दिर जाना शुरु करो*।
         
  *जरुर सोचें।*

No comments:

Post a Comment

माका अर्थात भृंगराज

माका अर्थात भृंगराज आयुर्वेदात याचा आवाज रानावनात शेतात बांधावर माका अर्थात भृंगराज मीळतो. यात ईतके रसायने आहेत की गाईचे दुध व माकारस तुम्...