*वृषभोत्सव* :
वेदो मे भी बैल,नंदी का पूजन विधी बताया है। भारतीय सांस्कृतीक विश्वविद्यालय, तिरूपती,चि. कौंटीण्य ने यह खोज कि है।
*वृषभ उत्सव*कार्तिक मास का प्रथम दिवस लघुदा प्रतिपदा कहा जाता है।
लघुदा का अर्थ है डंडा। ऋषभ के सींघों को तेल का लेप लगाने के पश्चात हल्दी पाउडर और फूलों की सुगंधी से सुसज्जित कर उसे गांव में भ्रमण कराते हैं।
प्रक्रिया की महत्ता
किसान गहनों से सुसज्जित ,चंदन का लेप और गेरुआ वस्त्र धारण कर मधुर संगीत बजाते हुए सुसज्जित वृषभ के साथ गांव में भ्रमण करते हैं ।
इससे गांवों में खुशहाली और संपन्नता आती है , नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं।
(कृषि पराशर १०१)
हम आज आपका सुगंधित पुष्प माला आदि से पूजन करते हैं। कृपया आप हमारे लिए शुभ फलदाई हों। हे गुणसंपन्न प्रतिभावान आप हमारे लिए सर्वदा रक्षक हों।
किसी भी जाति धर्म संप्रदाय से परे।
हम अपने अन्नदाता किसान को प्रसन्न और सम्मानित रखना चाहते हैं।
आइए हम सब मिलकर अपने इस परंपरागत त्यौहार को अपने देश की संपदा और किसानों की खुशी के लिए मिलकर मनाएं।
धर्म के रक्षक ( वृषभ) और किसान का सम्मान ही इस आयोजन का प्रयोजन हो.
*वृषभ उत्सव*कार्तिक मास का प्रथम दिवस लघुदा प्रतिपदा कहा जाता है।
लघुदा का अर्थ है डंडा। ऋषभ के सींघों को तेल का लेप लगाने के पश्चात हल्दी पाउडर और फूलों की स: अनुभूति/ग्रहणबोध
1. प्लास्टि का यथासंभव वर्जन : यह हमारे पशुओं के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
(प्लास्टिक यथासंभव प्रयोग में ना लाएं)
२. खेती और बैलगाड़ी हेतु वृषभ का उपयोग करने वाले सज्जन महानुभाव समाज में सम्मानित हों।
३. गायों के लिए कृत्रिम शुक्राणु न अपनाएं।
प्रजनन की प्राकृतिक प्रक्रिया को अपनाएं।
(सप्तऋषियों के सात अलग-अलग गोत्र हैं और प्रत्येक गोत्र गाय और एक वृषभ के रूप में परिलक्षित है। कृत्रिम शुक्राणु से गाय और वृषभ में यह गोत्र परिलक्षित नहीं हो पाता है)
४. प्रत्येक गांव में एक वृषभ होना ही चाहिए और अगली नई पीढ़ी के जनन हेतु उसे कम से कम 3 वर्ष उस गांव में रहना चाहिए.
५. कृषि शास्त्र के अनुसार मृगशिरा नक्षत्र सोमवार, बुधवार ,बृहस्पतिवार और शुक्रवार को खेतों की जुताई करने से फसल अच्छी आती है।
किसान को निश्चित रूप से अधिक उपज और धन संपदा की प्राप्ति होती है।
वेदो मे भी बैल,नंदी का पूजन विधी बताया है। भारतीय सांस्कृतीक विश्वविद्यालय, तिरूपती,चि. कौंटीण्य ने यह खोज कि है।
*वृषभ उत्सव*कार्तिक मास का प्रथम दिवस लघुदा प्रतिपदा कहा जाता है।
लघुदा का अर्थ है डंडा। ऋषभ के सींघों को तेल का लेप लगाने के पश्चात हल्दी पाउडर और फूलों की सुगंधी से सुसज्जित कर उसे गांव में भ्रमण कराते हैं।
प्रक्रिया की महत्ता
किसान गहनों से सुसज्जित ,चंदन का लेप और गेरुआ वस्त्र धारण कर मधुर संगीत बजाते हुए सुसज्जित वृषभ के साथ गांव में भ्रमण करते हैं ।
इससे गांवों में खुशहाली और संपन्नता आती है , नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं।
(कृषि पराशर १०१)
हम आज आपका सुगंधित पुष्प माला आदि से पूजन करते हैं। कृपया आप हमारे लिए शुभ फलदाई हों। हे गुणसंपन्न प्रतिभावान आप हमारे लिए सर्वदा रक्षक हों।
किसी भी जाति धर्म संप्रदाय से परे।
हम अपने अन्नदाता किसान को प्रसन्न और सम्मानित रखना चाहते हैं।
आइए हम सब मिलकर अपने इस परंपरागत त्यौहार को अपने देश की संपदा और किसानों की खुशी के लिए मिलकर मनाएं।
धर्म के रक्षक ( वृषभ) और किसान का सम्मान ही इस आयोजन का प्रयोजन हो.
*वृषभ उत्सव*कार्तिक मास का प्रथम दिवस लघुदा प्रतिपदा कहा जाता है।
लघुदा का अर्थ है डंडा। ऋषभ के सींघों को तेल का लेप लगाने के पश्चात हल्दी पाउडर और फूलों की स: अनुभूति/ग्रहणबोध
1. प्लास्टि का यथासंभव वर्जन : यह हमारे पशुओं के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
(प्लास्टिक यथासंभव प्रयोग में ना लाएं)
२. खेती और बैलगाड़ी हेतु वृषभ का उपयोग करने वाले सज्जन महानुभाव समाज में सम्मानित हों।
३. गायों के लिए कृत्रिम शुक्राणु न अपनाएं।
प्रजनन की प्राकृतिक प्रक्रिया को अपनाएं।
(सप्तऋषियों के सात अलग-अलग गोत्र हैं और प्रत्येक गोत्र गाय और एक वृषभ के रूप में परिलक्षित है। कृत्रिम शुक्राणु से गाय और वृषभ में यह गोत्र परिलक्षित नहीं हो पाता है)
४. प्रत्येक गांव में एक वृषभ होना ही चाहिए और अगली नई पीढ़ी के जनन हेतु उसे कम से कम 3 वर्ष उस गांव में रहना चाहिए.
५. कृषि शास्त्र के अनुसार मृगशिरा नक्षत्र सोमवार, बुधवार ,बृहस्पतिवार और शुक्रवार को खेतों की जुताई करने से फसल अच्छी आती है।
किसान को निश्चित रूप से अधिक उपज और धन संपदा की प्राप्ति होती है।
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